भारतीय सिनेमा के बागी की वापसी! सिद्धांत चतुर्वेदी निभाएंगे दिग्गज वी. शांताराम की भूमिका

भारतीय सिनेमा एक ऐतिहासिक क्षण का साक्षी बनने जा रहा है, क्योंकि भूले-बिसरे वैश्विक आइकन वी. शांताराम की विरासत अब एक नई पीढ़ी को प्रेरित करने के लिए बड़े पर्दे पर लौट रही है। सिद्धांत चतुर्वेदी अपने करियर की सबसे रूपांतरणकारी और चुनौतीपूर्ण भूमिका निभाते हुए उस अग्रणी फिल्मकार को जीवंत करेंगे, जिन्हें लंबे समय से भारतीय सिनेमा का मूल बागी कहा जाता रहा है।

घोषणा-पोस्टर ने मचाई धूम

मेकर्स ने इस भव्य जीवनी-आधारित फिल्म के घोषणा-पोस्टर में सिद्धांत को वी. शांताराम के रूप में पेश किया है। यह पोस्टर न सिर्फ फिल्म की भव्यता का संकेत देता है, बल्कि उस गहराई और शक्ति की भी झलक दिखाता है, जो शांताराम जी के व्यक्तित्व का मुख्य आधार थी।

सिद्धांत चतुर्वेदी का भावनात्मक वक्तव्य

सिद्धांत चतुर्वेदी कहते हैं, “वी. शांताराम जी को निभाना मेरे जीवन के सबसे बड़े सम्मान में से एक है। उनकी यात्रा के बारे में जितना पढ़ा, उतना ही विनम्र होता गया। वे सिर्फ भारतीय और वैश्विक सिनेमा के अग्रदूत नहीं थे, बल्कि एक दूरदर्शी थे जो हर बाधा के बावजूद आगे बढ़ते रहे। उनकी दुनिया में कदम रखना मेरे लिए एक अभिनेता के रूप में सबसे रूपांतरणकारी अनुभव रहा। उनका जीवन मुझे गहराई से छू गया और धैर्य की शक्ति की याद दिलाई। यह सीख मैं अपने काम और जीवन के हर पल में संजोकर रखना चाहता हूं।”

दिग्दर्शक अभिजीत शिरीष देशपांडे की दृष्टि

दिग्दर्शक अभिजीत शिरीष देशपांडे बताते हैं, “वी. शांताराम मेरे लिए हमेशा से प्रेरणा-स्रोत रहे हैं। उनके भीतर प्रयोग करने का साहस था, उनकी दृष्टि अलौकिक थी, और उनकी कृतियों ने आज के भारतीय सिनेमा को आकार दिया है। उनकी कहानी कहना मेरे लिए गर्व की बात है। सिद्धांत चतुर्वेदी इस भूमिका के लिए हमेशा से हमारी पहली पसंद थे, और इस पोस्टर के साथ हम उसी यात्रा की शुरुआत दिखा रहे हैं जिसका इंतज़ार लंबे समय से था।”

निर्माताओं के मन की बात

निर्माता सुभाष काले कहते हैं, “वी. शांताराम जी की विरासत भारतीय सिनेमा के सबसे मजबूत स्तंभों में से एक है। उनके संघर्ष, उनकी दृष्टि और उनकी नवाचार-शक्ति ने कई पीढ़ियों को प्रेरित किया है। इस फिल्म के माध्यम से हम उनके जीवन को सबसे ईमानदार तरीके से सम्मानित करना चाहते हैं। हमें गर्व है कि सिद्धांत चतुर्वेदी इस भूमिका में कदम रख रहे हैं।”

निर्माता सरिता अश्विन वर्दे का मानना है, “वी. शांताराम सिर्फ महान फिल्मकार नहीं हैं, वे भारतीय सिनेमा की आत्मा हैं। फिर भी उन्हें वह सम्मान हमेशा नहीं मिला जिसके वे हकदार थे। इस फिल्म के ज़रिए हम उनकी दूरदर्शिता और कलात्मकता को नई रोशनी देने का प्रयास कर रहे हैं। सिद्धांत इस भूमिका के लिए हमारी पहली और एकमात्र पसंद थे—उनकी सच्चाई और समर्पण उन्हें शांताराम जी का परफेक्ट रूप बनाते हैं।”

शांताराम जी की विरासत — मूक से रंगीन सिनेमा तक की यात्रा

यह ऐतिहासिक बायोपिक भारत के सबसे दूरदर्शी कथाकारों में से एक की रंगीन जीवन-यात्रा को बड़े पर्दे पर साकार करती है। अभिजीत शिरीष देशपांडे द्वारा लिखित और निर्देशित यह फिल्म शांताराम जी की असाधारण यात्रा का अनुसरण करती है—मूक फिल्मों के दौर से लेकर ध्वनि और फिर रंगीन युग तक—जहां वे भारतीय सिनेमा की सबसे प्रभावशाली हस्तियों में से एक बनकर उभरे।

भव्य निर्माण और दूरदर्शी प्रस्तुति

राजकमल एंटरटेनमेंट, कैमरा टेक फिल्म्स और रोअरिंग रिवर्स प्रोडक्शन्स द्वारा प्रस्तुत ‘वी. शांताराम’ का निर्माण राहुल किरण शांताराम, सुभाष काले और सरिता अश्विन वर्दे कर रहे हैं। इस विशाल और प्रेरणादायी कथा को अभिजीत शिरीष देशपांडे ने अपने निर्देशन से एक सिनेमाई रूप दिया है, जो भारतीय सिनेमा के स्वर्णिम इतिहास को पुनर्जीवित करेगा।

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